मैं बैरागन हूँगी
हो, बाला
मैं बैरागन हूँगी, हूँगी
मैं बैरागन हूँगी
मैं बैरागन हूँगी
हो, बाला
मैं बैरागन हूँगी, हूँगी
मैं बैरागन हूँगी
मैं बैरागन हूँगी
जिन भेषा म्हारो साँवरो रिझे
जिन भेषा मेरो साँवरो रिझे
सोहिं भेष धरूँगी
हो, बाला, सोहिं भेष धरूँगी, हो
मैं बैरागन हूँगी
मैं बैरागन हूँगी
कहो तो कुसुमल साड़ी रंगावा
कहो तो कुसुमल साड़ी रंगावा
कहो तो कुसुमल साड़ी रंगावा
कहो तो कुसुमल साड़ी रंगावा
कहो तो भगवा भेष
कहो तो भगवा भेष
कहो तो मोतियन माँग भरावा
कहो तो मोतियन माँग भरावा
कहो छिटकावा केश
कहो छिटकावा केश
बाला, मैं बैरागन हूँगी
मैं बैरागन हूँगी
हो, बाला
मैं बैरागन हूँगी, हूँगी
मैं बैरागन हूँगी
मैं बैरागन हूँगी
प्राण हमारा वहाँ बसत है
प्राण हमारा वहाँ बसत है
प्राण हमारा वहाँ बसत है
प्राण हमारा वहाँ बसत है
यहाँ तो खाली खोड़
यहाँ तो खाली खोड़
मात-पिता परिवार सोई है
मात-पिता परिवार सोई है
कहिए दिन का तोड़
बाला, कहिए दिन का तोड़ रे, ओ बाला
मैं बैरागन हूँगी
मैं बैरागन हूँगी
हो, बाला
मैं बैरागन हूँगी, हूँगी
मैं बैरागन हूँगी
मैं बैरागन हूँगी
मैं बैरागन हूँगी
🎵 मैं बैरागन हूँगी – भजन सुनें
🙏 भजन का भाव
इस भजन में मीरा बाई श्री कृष्ण के प्रति अपने पूर्ण प्रेम, समर्पण और वैराग्य की भावना व्यक्त करती हैं। वे कहती हैं कि उनके साँवरे को जिस भेष में प्रसन्नता मिलेगी, वे वही भेष धारण करेंगी। यह भजन भगवान के प्रति मीरा की अनन्य भक्ति और प्रेम को दर्शाता है।
🌸 भजन से मिलने वाली सीख
सच्ची भक्ति में प्रेम, विश्वास और पूर्ण समर्पण का भाव होता है। मीरा बाई का जीवन हमें सिखाता है कि भगवान के प्रति सच्चा प्रेम सांसारिक मोह से ऊपर होता है।