इति प्रणम्य स्तुत्वा च योनि मुद्रां प्रदर्श येत।।१३।।
।।इति नीलसरस्वतीस्तोत्रं सम्पूर्णम्।।
नील सरस्वती स्तोत्र का हिंदी अर्थ
(Neel Saraswati Stotram)
हे देवी, अपनी विकराल और भयानक अभिव्यक्ति में, सभी विरोधियों में भय पैदा करते हुए,
अपने भक्तों पर अपना आशीर्वाद बरसाएं और अपनी शरण में मेरी रक्षा करें।
हे देवी, देवताओं और राक्षसों द्वारा समान रूप से पूजनीय, सिद्धों और गंधर्वों द्वारा सम्मानित,
हे देवी, जड़ता और पापों को दूर करने वाली, मेरी रक्षा करो, जो तुम में शरण चाहता है।
हे उलझे हुए बालों और उभरी हुई जीभ से सुशोभित, बुद्धि को जीवंत करने वाली देवी,
आपकी शरण में आने वाले मेरी रक्षा करें।
हे देवी, सौम्य और क्रोध दोनों रूपों से युक्त, मैं विनम्रतापूर्वक सृजन की प्रतीक आपको नमन करता हूं।
आपकी शरण में आने वाले मेरी रक्षा करें।
आप अज्ञानियों की अज्ञानता को दूर करते हैं और अपने भक्तों के प्रति स्नेह रखते हैं।
हे देवी, मेरी अज्ञानता दूर करो और मेरी रक्षा करो, जो तुममें शरण चाहता है।
हे देवी, मैं लालसा से ‘वं ह्रूं ह्रूं’ अक्षरों का आह्वान करता हूं। मैं यज्ञ से प्रसन्न होकर उग्र रूप में आपको प्रणाम करता हूँ।
मेरी रक्षा करो, जो तेरी शरण में आता हूँ।
हे देवी, मुझे बुद्धि प्रदान करो, मुझे यश प्रदान करो, मुझे काव्यात्मक वाक्पटुता प्रदान करो।
हे देवी, मेरी अज्ञानता दूर करो और तुम्हारी शरण में आने वाले मेरी रक्षा करो।
हे देवी, इंद्र और अन्य लोगों द्वारा पूजित, दयालु, आप शरण चाहने वालों की संरक्षक हैं।
मेरी रक्षा करो, जो तेरी शरण में आता हूँ।
जो कोई आठवें, चौदहवें या नौवें दिन इस स्तोत्र का पाठ करेगा,
उसे छह महीने के भीतर निःसंदेह सफलता प्राप्त होगी।
मुक्ति चाहने वाले को मुक्ति मिलती है, धन चाहने वाले को धन प्राप्त होता है,
ज्ञान चाहने वाले को तर्क और व्याकरण सहित गहन समझ प्राप्त होती है।
जो लोग श्रद्धापूर्वक नियमित रूप से इस भजन का पाठ करते हैं,
वे अपने शत्रुओं के विनाश और अपने भीतर महान ज्ञान के उदय का गवाह बनेंगे।
क्लेश, कलह, जड़ता, परोपकार या भय के समय, निस्संदेह,
जो लोग इस भजन को पढ़ते हैं उन्हें शुभता प्राप्त होती है।
इस प्रकार नमस्कार और स्तुति करने के बाद,
व्यक्ति को योनि मुद्रा प्रदर्शित करनी चाहिए, जो महिला प्रजनन अंग का प्रतीक है।
Neel Saraswati Stotram in English Lyrics
Ghorarupe maharave sarvasatrubhayankari
Bhaktebhyo varade devi trahi mam saranagatam
Om surasurarcite devi siddhagandharvasevite
Jadyapapahare devi trahi mam saranagatam
Jaṭajuṭasamayukte lolajihvantakarini
Drutabuddhikare devi trahi mam saranagatam
Saumyakrodhadhare rupe chandarupe namostute
Sṛṣṭirupe namastubhyam trahi mam saranagatam
Jadanam jadatam hanti bhaktanam bhaktavatsala
Mudhatam hara me devi trahi mam saranagatam
Vam hrum hrum kamaye devi balihomapriye namaḥ
Ugratare namo nityam trahi mam saranagatam
Buddhim dehi yaso dehi kavitvam dehi dehi me
Mudhatvam cha hareddevi trahi mam saranagatam
Indradivilasad-dvandvavandite karunamayi
Tare taradhinathasye trahi mam saranagatam
Aṣṭamyam cha caturdasyam navamyam yaḥ paṭhennaraḥ
Sanmasaih siddhimapnoti natra karya vicarana
Mokṣarthi labhate mokṣam dhanarthi labhate dhanam
Vidyarthi labhate vidyam tarkavyakaranadikam
Idam stotram paṭhedyastu satatam sraddhayanvitaḥ
Tasya satruḥ kṣayam yati mahaprajna prajayate
Pidayam vapi samgrame jadye dane tatha bhaye
Ya idam pathati stotram subham tasya na samsayaḥ
Iti pranamya stutva cha yonimudram pradarsayet
नील सरस्वती स्तोत्र को पढ़ने की विधि
(Neel Saraswati Stotram)
प्रारंभ में, शुभ मुहूर्त चुनें और माता को ध्यान लगावें, शत्रु पर विजय पाने के लिए इस स्तोत्र का पाठ अष्टमी, नवमी और चतुर्दशी को अवश्य करना चाहिए।
पूजा स्थल को शुद्ध करें और मां सरस्वती की मूर्ति, या उनकी चित्र पर अपने ध्यान को केंद्रित करें।
मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठें या खड़े रहे।
प्रारंभ करने से पहले, माता के ध्यान में चलें जाये और मां सरस्वती के चरणों में आवाहन करें।
फिर नील सरस्वती स्तोत्र (Neel Saraswati Stotram) का पाठ करें, विशेष ध्यान देते हुए मां सरस्वती की महिमा को स्तुति करें।
अंत में, मां सरस्वती को अर्पण करें और उनसे आशीर्वाद मांगें।
स्तोत्र का पाठ करते समय, शुद्धता, श्रद्धा, और समर्पण के साथ पूर्ण करें।
ध्यान रखें कि नील सरस्वती स्तोत्र (Neel Saraswati Stotram) का पाठ शुभ मुहूर्त (अष्टमी, नवमी और चतुर्दशी) में और नियमित रूप से किया जाना चाहिए ताकि मां सरस्वती की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त हो सकें।
मंत्र पुष्पांजलि का अर्थ (Meaning of Mantra Pushpanjali)
पहला: यज्ञ के माध्यम से ही देवताओं ने प्रजापति की पूजा की। वे यज्ञ और तत्सम पूजा के प्रारंभिक अनुष्ठान कर्ता थे। यज्ञ करने से साधक उस दिव्य लोक में पहुँचकर महानता प्राप्त करता है जहाँ पहले देवता निवास करते थे।
दूसरा: हम राजा वैश्रवण कुबेर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जो हमारे लिए अनुकूल परिस्थितियाँ सुनिश्चित करते हैं। कामना करने वाले की सभी मनोकामनाएं कामनेश्वर कुबेर पूर्ण करें।
तीसरा: हमारा लक्ष्य सबके लिए कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है। हमारा राज्य सभी वस्तुओं से प्रचुर मात्रा में सुसज्जित हो। यहां लोकराज्य हो। हमारा राज्य मोह और लोभ से रहित होना चाहिए। हम एक सर्वोच्च शासक के रूप में उत्कृष्टता प्राप्त करें। हमारा राज्य क्षितिज के पार सुरक्षित रहे और ज़मीन से लेकर समुद्र तक एक स्थायी शासन का आनंद उठाए। हमारा राज्य अंत तक कायम रहे।
चौथा: यह श्लोक राज्य और उसकी महिमा के सम्मान में गाया जाता है। हमें अविक्षित के पुत्र मरुती के सहयोग से राज्य प्राप्त हो। यही कामना है।
मंत्र पुष्पांजलि की विधि (Mantra Pushpanjali Vidhi)
तैयारी: इस मंत्र का पाठ करने से पहले, शुद्धि और संकल्प करें। ध्यान और मन को एकाग्र रखें।
पूजा स्थल: एक शुद्ध और साफ पूजा स्थल चुनें। यह स्थल आरामदायक होना चाहिए और पूजा के लिए उपयुक्त होना चाहिए।
आसन: पूजा के लिए विशेष आसन पर बैठें। सही आसन में बैठकर ध्यान में रहें।
मंत्र पुष्पांजलि का पाठ: मंत्र पुष्पांजलि को धीमी आवाज में ध्यानपूर्वक पढ़ें। इसे ध्यान से सुनते हुए उच्चारण करें।
पुष्पांजलि अर्पण: मंत्र पाठ करते समय, फूलों की माला या अन्य फूलों को अपने हाथों में लें। मंत्र पूरा होने पर फूलों को ईश्वर को अर्पित करें।
ध्यान और प्रार्थना: मंत्र पुष्पांजलि के पाठ के बाद, ध्यान करें और ईश्वर से आशीर्वाद और शांति की प्रार्थना करें।
समापन: सम्पूर्ण प्रक्रिया के बाद, ध्यान और आनंद से शांति का अनुभव करें।
मंत्र पुष्पांजलि के फायदे (Benefit of Mantra Pushpanjali)
आत्मशुद्धि: इस मंत्र का जाप करने से आत्मा में शुद्धि और ऊर्जा का संचार होता है।
ध्यान और शांति: इस मंत्र के जाप से चित्त शांति और ध्यान में स्थिरता मिलती है।
सामाजिक सहयोग: यह मंत्र समाज में सहयोग, समृद्धि और सामंजस्य की भावना विकसित करता है।
आध्यात्मिक उन्नति: इसके जाप से आध्यात्मिक उन्नति होती है और आध्यात्मिक उद्देश्यों की प्राप्ति में मार्गदर्शन होता है।
व्यक्तिगत उन्नति: इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति की मानसिक, आध्यात्मिक और शारीरिक स्थिति में सुधार हो सकता है।
कृपा और आशीर्वाद: यह मंत्र ईश्वर की कृपा, शक्ति, और आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद करता है।
सुख-शांति की प्राप्ति: इस मंत्र के जाप से समय की ऊर्जा, शांति, और सफलता प्राप्त होती है।
हे प्रभु मै आपको बुलाना जनता हूँ।और न ही विदा करना। और न ही मै पूजा करना जनता हूँ। कृपया करके मुझे क्षमा करे। न ही मुझे मंत्र याद है और न ही क्रिया न ही भक्ति करना जनता हूँ। यथासंभव पूजा कर रहा हूँ। आप मेरे भूलो को क्षमा कर इस पूजा को पूर्णता प्रदान करे।
अन्य क्षमा याचना मंत्र (Other Kshama Yachna Mantra)
क्षमा याचना मंत्र के लाभ (Kshama Yachna Mantra Benefit)
आत्म-स्वीकृति और आत्म-सम्मान में वृद्धि:
क्षमा याचना मंत्र हमें यह स्वीकार करने में मदद करता है कि हम सभी मनुष्य हैं और हम सभी गलतियाँ करते हैं। यह हमें अपने आप को और दूसरों को माफ करने में मदद करता है, जिससे आत्म-स्वीकृति और आत्म-सम्मान में वृद्धि होती है।
मानसिक शांति और स्पष्टता:
क्षमा याचना मंत्र हमें अपनी गलतियों से मुक्त होने में मदद करता है। यह हमें मानसिक शांति और स्पष्टता प्राप्त करने में मदद करता है, जिससे हमें बेहतर निर्णय लेने और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव करने में मदद मिलती है।
रिश्तों में सुधार:
क्षमा याचना मंत्र हमें दूसरों से क्षमा मांगने और उन्हें माफ करने में मदद करता है। यह रिश्ते में विश्वास, सम्मान और सद्भाव को बढ़ावा देता है।
आध्यात्मिक विकास:
क्षमा एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक गुण है। क्षमायाचना मंत्र हमें दूसरों और स्वयं के साथ अधिक दयालु और क्षमा करने वाले होने में मदद करता है। यह आध्यात्मिक विकास की ओर ले जाता है।
क्षमा याचना मंत्र विधि (Kshama Yachna Mantra Vidhi)एकांत में बैठें।
अपनी आंखें बंद करें और अपनी सांस पर ध्यान केंद्रित करें।
मंत्र का जाप करना शुरू करें।
मंत्र के अर्थ पर ध्यान केंद्रित करें।
अपनी गलतियों के लिए ईमानदारी से माफी मांगें।
मंत्र का जाप तब तक करें जब तक आप शांति और स्पष्टता का अनुभव न करें।
क्षमायाचना मंत्र का जाप करने के लिए कोई विशेष समय या स्थान आवश्यक नहीं है। आप इसे सुबह, शाम या किसी भी समय जब आपके पास कुछ शांत क्षण हों, कह सकते हैं।
सिद्ध कुंजिका स्तोत्र लाभ (Sidhha Kunjika Stotra Benefit)
शांति और समृद्धि: माना जाता है कि यह स्तोत्र आपके जीवन में शांति और समृद्धि लाता है। यह आपको धन, संपत्ति, अच्छे स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख-समृद्धि प्रदान कर सकता है।
सफलता: यह स्तोत्र आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर सकता है। यह आपको अपने करियर में सफलता, व्यापार में लाभ और शिक्षा में प्रगति प्रदान कर सकता है।
सुरक्षा: यह स्तोत्र आपको सभी प्रकार की बुराई से बचा सकता है। यह आपको शत्रुओं, दुर्घटनाओं और रोगों से बचा सकता है।
भय और नकारात्मकता को दूर करना: यह स्तोत्र आपके जीवन से भय और नकारात्मकता को दूर करने में मदद कर सकता है। यह आपको आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान कर सकता है।
सिद्ध कुंजिका स्तोत्र विधि (Sidhha Kunjika Stotra Vidhi)
स्तोत्र का जप करने से पहले स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
एक शांत और पवित्र स्थान पर बैठें।
माता दुर्गा की मूर्ति, या उनका चित्र, या किसी स्थान पर ध्यान दें जहां आप बैठकर पूजा करना चाहेंगे।
स्तोत्र का जप ध्यानपूर्वक और स्पष्ट उच्चारण के साथ करें।
स्तोत्र का जप करने के बाद, देवी दुर्गा को नमस्कार करें।
स्तोत्र का जप एक माला (108 मोती) का उपयोग करके किया जा सकता है।
स्तोत्र का जप कम से कम 108 बार करें।
पूजा को समाप्त करने के बाद, प्रासाद बांटें और आपकी पूर्णता और कष्टों की निवृत्ति के लिए माता से आशीर्वाद प्राप्त करें।
पग से पग मिलकर चलो ,स्वर से स्वर मिलकर बोलो ,तुम्हारे मन में समय ज्ञान हो ,पूर्व कल में जैसे देवों ने अपना भाग प्राप्त किया ,एक साथ मिलकर बुद्धि से कार्य करने वाले उसी प्रकार अपना-अपना अभीष्ट प्राप्त करते है।
दूसरा श्लोक
मिलकर कार्य करने वालों का मंत्र सामान होता है चित्त सहित इनका मन सामान होता है। मैं तुम्हे मिलकर समान निष्कर्ष पर पहुंचने की प्रेरणा देता हूँ ,तुम्हे सामान भोज्य प्रदान करता हूँ।
तीसरा श्लोक
हम सभी के संकल्प एक सामान हो ,हम सभी के ह्रदय की इच्छाएं एक सामान हो ,हम सभी के विचार एक सामान हो जिनसे की हम सब में पूर्ण समरसता आए
ॐ शांति हो ,ॐ शांति हो ,ॐ शांति हो ||
संगठन मंत्र का महत्व (Sangathan Mantra Importance)
संगठन का महत्व:
संगठन मंत्र में संगठन के महत्व को बताया गया है। संगठन को शक्ति, वीरता, धर्म, संस्कृति, राष्ट्र-विकास, राष्ट्र-उन्नति, राष्ट्र-रक्षा, धर्म, सत्य, नीति और शक्ति का आधार माना गया है। संगठन को सर्वस्व और जीवन का आधार माना गया है।
संगठन और सुख-शांति:
संगठन मंत्र में कहा गया है कि जिस देश में संगठन नहीं, वहाँ सुख-शांति नहीं। संगठन ही देश को एकता और शक्ति प्रदान करता है। संगठन से ही देश में सुख-शांति आती है।
संगठन और शक्ति:
संगठन मंत्र में कहा गया है कि संगठन ही शक्ति है। संगठन से ही वीरता का जन्म होता है। संगठन से ही राष्ट्र का विकास और उन्नति होती है। संगठन से ही राष्ट्र की रक्षा होती है।
संगठन और धर्म:
संगठन मंत्र में कहा गया है कि संगठन ही धर्म है। संगठन ही संस्कृति को संरक्षित करता है। संगठन से ही राष्ट्र की उन्नति होती है।
संगठन और सर्वस्व:
संगठन मंत्र में कहा गया है कि संगठन ही सर्वस्व है। संगठन ही जीवन है। संगठन ही आधार है। संगठन ही विश्वास है।
संगठन मंत्र के लाभ (Sangathan Mantra Benefit)
राष्ट्र के महत्व को समझना:
संगठन मंत्र संगठन के महत्व को समझने में मदद करता है। संगठन ही शक्ति, वीरता, धर्म, संस्कृति, राष्ट्र-विकास, राष्ट्र-उन्नति, राष्ट्र-रक्षा, धर्म, सत्य, नीति और शक्ति का आधार है।
राष्ट्र के प्रति समर्पण:
संगठन मंत्र संगठन के प्रति समर्पण को बढ़ावा देता है। संगठन ही कार्यकर्ताओं का सर्वस्व है। संगठन ही कार्यकर्ताओं का जीवन है। संगठन ही कार्यकर्ताओं का आधार है।
राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बढ़ावा:
संगठन मंत्र राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बढ़ावा देता है। संगठन ही देश को एकता और शक्ति प्रदान करता है। संगठन से ही देश में सुख-शांति आती है।
धर्म और संस्कृति को संरक्षित:
संगठन मंत्र धर्म और संस्कृति को संरक्षित करने में मदद करता है। संगठन ही धर्म का पालन करने का आधार है। संगठन ही संस्कृति को संरक्षित करता है।
राष्ट्र के विकास और उन्नति में योगदान:
संगठन मंत्र राष्ट्र के विकास और उन्नति में योगदान देता है। संगठन से ही राष्ट्र का विकास और उन्नति होती है। संगठन ही देश को मजबूत और स्वावलंबी बनाता है।
“ॐ” का अर्थ है ब्रह्मांड का मूल मंत्र। यह मंत्र ब्रह्मांड की शक्ति और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। “सों” का अर्थ है चंद्र देव का बीज मंत्र। यह बीज मंत्र चंद्र देव की शक्ति और ऊर्जा को भी दर्शाता है। “सोमाय” का अर्थ है चंद्र देव को समर्पित। यह मंत्र चंद्र देव को अपना आराध्य मानता है। “नम:” का अर्थ है प्रणाम। यह मंत्र चंद्र देव के प्रति श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करता है।
चंद्र देव मंत्र विधि (Chandra Dev Mantra Vidhi)
सर्वप्रथम चंद्र देव मंत्र का जाप करने के लिए एकांत स्थान पर बैठें।
चंद्र देव मंत्र का जाप करते समय अपने मन को शांत रखे।
चंद्र देव मंत्र का जाप करने के लिए चंद्र देव की प्रतिमा या तस्वीर के सामने बैठें।
चंद्र देव मंत्र का जाप आपने हाथों को जोड़कर शुरू करें।
चंद्र देव मंत्र का जाप करते समय अपने मन में चंद्र देव के प्रति श्रद्धा और भक्ति रखें।
मंत्रों का उच्चारण स्पष्ट होना चाहिए।
चंद्र देव मंत्र के लाभ (Chandra Dev Mantra Benefit)
मन को शांति:
चंद्र देव मंत्रों का जाप करने से मन को शांति मिलती है।
भावनाओं को नियंत्रित:
चंद्र देव मंत्र का जाप करने से भावनाओं को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
एकाग्रता:
चंद्र देव मंत्र का जाप करने से एकाग्रता बढ़ती है।
जीवन शक्ति:
चंद्र देव मंत्र का जाप करने से जीवन शक्ति में वृद्धि होती है।
चंद्र दोष:
चंद्र देव मंत्र का जाप करने से चंद्र दोष दूर होता है।